Kamala Harris Is Not Going To Be 24×7 Friend Of India – Meghnad Desai

भारत को 24×7 नहीं मिल सकता कमला हैरिस का साथ: लॉर्ड मेघनाद देसाई

15 जनवरी 2021, कोलकाता: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन के नेतृत्व में भारत-अमेरिका के रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए ब्रिटिश अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ, लॉर्ड मेघनाद देसाई ने कहा, मुझे नहीं लगता कि कमला हैरिस भारत के हर पल साथ रहनेवाली दोस्त हैं। कई चीजों पर उनके अपने विचार हैं। मेरी विचारधारा से भारत और यूएसए में कई मुद्दों को लेकर संभवतः मतभेद रहेंगे, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री दोनों की विचारधारा पर मानव अधिकारों, कश्मीर आदि के मुद्दों पर नरेंद्र मोदी और जो बिडेन के बीच मतभेद हो सकते हैं। क्योंकि इसके पहले अमेरिका में कांग्रेस के लोकतांत्रिक सदस्यों के साथ ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने पर भी पहले से ही रह चुके हैं।

कोलकाता की सुप्रसिद्ध सामाजिक संस्था प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं श्री सिमेंट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम किताब श्रृंखला के एक ऑनलाइन सत्र को लॉर्ड मेघनाद देसाई संबोधित कर रहे थे। जहां उनकी नवीनतम पुस्तक “रिबेलियस लॉर्ड: एन ऑटोबायोग्राफी” को औपचारिक रूप से प्रमुख अतिथि अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया (भारतीय अर्थशास्त्री और पूर्व सिविल सर्वेंट) ने किताब कार्यक्रम में ऑनलाइन लॉन्च किया। इस सत्र की औपचारिक रूप से शुरुआत अहसास वुमन के अहमदाबाद शाखा की सुश्री प्रियांशी पटेल ने की। इस मौके पर देशभर के विभिन्न शहरों से विशिष्ट अतिथि इसमें शामिल हुए।

भारत-चीन के बीच संबंधों पर श्री देसाई ने कहा, भारत-चीन मुद्दे का कोई हल नहीं है। यह दो बहुत गहरे राष्ट्रवादी ताकतों एवं दो पुरानी संस्कृतियों का टकराव है। इन दोनों देशों के बीच आपसी सामंजस्य बिठाना काफी मुश्किल है।

लॉर्ड मेघनाद जगदीश चंद्र देसाई, एक ब्रिटिश राजनीतिज्ञ, लेखक, अर्थशास्त्री, टिप्पणीकार, स्तंभकार और एक फिल्म शौकीन हैं, जिन्होंने अर्थशास्त्र, राजनीति, इतिहास, सिनेमा और कथा साहित्य पर 30 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें 2008 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण के सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने 49 साल के बाद यहूदी विरोधी भावना का हवाला देते हुए पिछले साल नवंबर में लेबर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। लॉर्ड देसाई की आत्मकथा “रेबेलियस लॉर्ड” उपयुक्त रूप से कई विषयों पर उनके विपरीत विचारों और दृष्टिकोण को दर्शाती है।

भारतीय फिल्मों के बारे में बात करते हुए देसाई ने कहा, बॉलीवुड और भारतीय फिल्मों में राज कपूर के समय से ही भारत में बननेवाली फिल्में पूरी दुनिया में अपना अदम्य प्रभाव डालती है। इसलिए विभिन्न निर्माताओं, लेखकों और निर्देशकों के लिए अलग-अलग तरह की कहानियां बताने की पर्याप्त गुंजाइश रखती है। पूरे विश्वभर के लोगों में यहां बननेवाली फिल्मों‍ को लेकर जो जुनून है, वह हैरान करने वाला है। मैं बॉलीवुड का एक बड़ा प्रशंसक हूं, मेरी पसंदीदा फिल्मों में दक्षिण भारत की कई फिल्में शामिल हैं, जिसमें सामग्री और मनोरंजन के साथ एक बहुत अच्छा कहानी रहता है।

90 के दशक के मध्य में भाजपा की आर्थिक नीतियों के विश्लेषण के बारे में श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया के एक सवाल के जवाब में, मेघनाद देसाई ने कहा, भाजपा की 25 साल पहले बहुत ही मंद आर्थिक नीति थी। मेंटर, दीन दयाल उपाध्याय का एक तरह का तीसरा विचार था, न तो पूंजीवाद और न ही समाजवाद। यह उस समय पूरी तरह से एक खिचड़ी बनी हुई थी। मैं बीजेपी के सभी घोषणापत्रों की गहराई में गया और 1998 में एनडीए गठबंधन के सत्ता में आने के दौरान जबरदस्त विकास पाया।

मेघनाद देसाई ने कहा, भारत में लोगों को एक नये रास्ते पर चलने की जरूरत है। मेरी सोच में भारत में कई तरह के अभिनव विकास हुए हैं। मैंने अपने लेख में कहा था कि भारत में कम्युनिस्ट क्रांति का कोई मौका नहीं था। 1991 के इसमें सुधार का प्रयास करना एक बड़ी बात थी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव ने वह किया जिसकी मुझे प्रतीक्षा थी। योजना आयोग में वे जानते थे कि मैं उनका मित्र हूं। यह बाहर के लोग थे जो आश्चर्यचकित थे – एक आदमी के मन में दो अलग-अलग विचार कैसे हो सकते हैं! इसलिए, मैंने अपनी जाति से इससे जुड़ा कई बार सवाल किया।

भारत के बारे में देसाई ने कहा, मैं भारत को राष्ट्रों के संग्रह के रूप में देखता हूं, जिसमें एक भाषा और एक क्षेत्र है, उसका एक धर्म भी हो सकता है। भाषा से सारा फर्क पड़ता है। भारत यूरोप का एक प्रकार है। जिन पुस्तकों पर मैं काम कर रहा हूं उनमें से एक यह दिखाएगा कि भारतीय इतिहास कितना विविध है। यह देश असम या केरल के किसी भी इतिहास को जानता है। इसलिए मैं लोगों को जागरूक करना चाहता हूं और कहना चाहता हूं कि भारत एक राष्ट्र राज्य है, इसकी समृद्ध सभ्यता में एकजुट झलकती है।

लेबर पार्टी छोड़ने के बारे में श्री देसाई ने कहा, 2015 में जेरेमी कॉर्बिन के साथ एक वामपंथी बदलाव हुआ था, बहुत सारे लोग आए थे। 1970 और 80 के दशक में कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोग थे, लेकिन हम उनसे निपट सकते थे, मैं उस समय अपनी पार्टी का अध्यक्ष था। लेकिन यह पूरी टीम यहूदी विरोधी थी और यहूदी सांसदों, खासकर यहूदी महिला सांसदों के साथ वे अभद्र वर्ताव करते थे।  पार्टी उनके खिलाफ आगे बढ़ने के लिए अनिच्छुक थी और आयोग को मानव अधिकार और समानता के बारे में बताया गया। आयोग ने कहा कि हाँ, पार्टी की एक समस्या थी। मैं इसके बारे में बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहा था। एक अंतिम रिपोर्ट आई और हमारे पूर्व नेताओं ने कहा कि यह राजनीतिक प्रचार था। उन्हें निलंबित कर दिया गया और उन्नीस दिन बाद फिर से वहां लाया गया। मैंने कहा कि मै अब यहां का सदस्य नहीं हूं। ये लोग यहूदी-विरोधी से निपटने के लिए गैर-गंभीर हैं, लेकिन मैं अपनी अंतरात्मा से सहज होना चाहता हूं इसलिए मैं अभी क्रॉस बेंच में बैठता हूं।

यूके में अपने लगभग पांच दशक के राजनीतिक करियर को दर्शाते हुए, श्री मेघनाद देसाई को लगता है कि राजनीति में होने का इनाम खुद अनुभव है।

    

किताब कोलकाता के प्रभा खेतान फाउंडेशन का एक हस्ताक्षर कार्यक्रम है, जिसे श्री संदीप भूतोरिया द्वारा परिकल्पित किया गया है। यह ऑनलाइन कार्यक्रम लेखकों, कवियों, बुद्धिजीवियों और विचारकों को अपनी पुस्तकों को लॉन्च करने और विभिन्न विषयों पर अपने विचार और विचार साझा करने और बौद्धिक विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए एक चर्चा मंच प्रदान करता है।