‘ज्योतिष मार्गदर्शन है, अंधविश्वास नहीं’ Bharat Podcastके स्टूडियो में गरजे -राहुल शास्त्री

नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में जहां एक ओर ज्योतिष और आध्यात्मिकता के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर फर्जी ज्योतिषियों और तांत्रिकों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। इसी विषय पर भारत पॉडकास्ट में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल शास्त्री ने होस्ट दीपक सारस्वत के साथ विस्तार से चर्चा की।

पॉडकास्ट के दौरान राहुल शास्त्री ने कहा कि आजकल कई लोगों ने ज्योतिष को केवल व्यवसाय बना दिया है। उनका मानना है कि केवल मोबाइल ऐप या ऑनलाइन कुंडली देखकर भविष्यवाणी करना पर्याप्त नहीं है। एक सच्चा ज्योतिषी वह होता है जो व्यक्ति के अतीत, वर्तमान और संभावित भविष्य का सही विश्लेषण कर सके।

उन्होंने ज्योतिष को “वेदों का नेत्र” बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को भयभीत करना नहीं बल्कि जीवन की चुनौतियों के प्रति पहले से सचेत करना है। ज्योतिष व्यक्ति को सही दिशा दिखाने का माध्यम है, न कि भाग्य को पूरी तरह बदल देने वाला कोई चमत्कार।

राहुल शास्त्री ने पंचांग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसे पांच प्रमुख अंग किसी भी शुभ कार्य के लिए सही मुहूर्त निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बिना उचित गणना के दिए गए मुहूर्त लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।

पॉडकास्ट में अंधविश्वास और विश्वास के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा हुई। राहुल शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा, बलि या नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों का वास्तविक ज्योतिष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी उपाय को अपनाने से पहले उसकी सत्यता और तर्क को समझें।

कर्ज़ मुक्ति और सफलता के विषय पर उन्होंने बताया कि व्यक्ति के ग्रह, दशा और चुने गए पेशे के बीच सामंजस्य होना आवश्यक है। कई बार मेहनत के बावजूद सफलता न मिलने का कारण ग्रहों का प्रभाव नहीं बल्कि गलत दिशा में प्रयास भी हो सकता है।

शनि और साढ़ेसाती को लेकर फैली भ्रांतियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि शनि को अनावश्यक रूप से भय का प्रतीक बना दिया गया है। उनके अनुसार शनि कर्मफलदाता हैं और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम देते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई लोगों को जीवन की बड़ी सफलताएं भी साढ़ेसाती के दौरान ही प्राप्त हुई हैं।

रिश्तों और प्रेम विवाह के विषय में राहुल शास्त्री ने कहा कि केवल आकर्षण को प्रेम नहीं कहा जा सकता। सफल वैवाहिक जीवन के लिए मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक सामंजस्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश वैवाहिक विवादों में किसी न किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका देखने को मिलती है।

रत्न धारण करने के विषय पर उन्होंने बताया कि बिना उचित ज्योतिषीय सलाह के कोई भी रत्न पहनना नुकसानदायक हो सकता है। सही ग्रह, सही रत्न और सही विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। साथ ही व्यक्ति को उस ग्रह से जुड़े आचरण और मूल्यों का पालन भी करना चाहिए।

पॉडकास्ट के अंत में राहुल शास्त्री ने लोगों को फर्जी बाबाओं और तांत्रिकों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कुछ घंटों या मिनटों में हर समस्या का समाधान करने का दावा करता है, उसकी सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए। किसी भी ज्योतिषी की प्रोफाइल, अनुभव और कार्यशैली को परखने के बाद ही उस पर भरोसा करना चाहिए।

इस चर्चा का मुख्य संदेश यही रहा कि ज्योतिष को अंधविश्वास नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक विज्ञान के रूप में देखा जाना चाहिए। लोगों को फर्जी दावों और भ्रम फैलाने वालों से बचते हुए विवेक और समझदारी के साथ निर्णय लेने चाहिए।

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